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Friday, 19 February 2016

बच्चो के लिए कितना जरूरी होता है योग ... जानिए

healthpatrika.com     19:56:00    
आजकल की रोजमर्रा की जिंदगी में बच्चे भी बीमारियों की चपेट में आने लगे हैं। इसीलिए ये जरूरी हो जाता है कि बच्चों को अधिक से अधिक सक्रिय रखा जाएं। बच्चों को सक्रिय रखने के लिए आपको चाहिए कि आप बच्चों को अपने साथ टहलने के लिए ले जाएं या फिर बच्चों से योग करवाएं और बच्चों के साथ योग करें।

baccho ke liye yoga in hindi

लेकिन क्या आप जानते हैं बच्चों को हर तरह के योग भी नहीं करवाने चाहिए, इतना ही नहीं बच्चों को योग के दौरान सावधानियां भी बरतनी चाहिए। लेकिन इससे पहले आपको यह भी जानना चाहिए कि बच्चों को योग करवाने के क्या फायदे हैं। योगा के जरिए क्या बच्चे भी वजन कम कर सकते हैं। आइए जानते हैं बच्चों के लिए योग के दौरान क्या करें,क्या ना करें।

बच्चों के लिए योग :-

- बच्चों को योग कराने के दौरान बैठने वाले आसनों में कमर सीधी करके बैठाएं।

- खड़े होने वाले आसनों में एकदम सीधा खड़ा करें।

- बच्चों को लंबी सांस लेने के लिए कहें जिससे योग का बच्चों को भरपूर लाभ मिल सकें।

- बच्चों को किसी भी काम पर फोकस करने के लिए बीच-बीच में योग का महत्व और योग के फायदों के बारे में जानकारी देते रहें।

- बच्चों से उच्चारण करवाएं जिससे बच्चे योगा के दौरान रोमांच महसूस करें।

बच्चों के लिए योग के फायदे :-

- योग बच्चों को अधिक से अधिक सक्रिय बनाता है। इतना ही नहीं उनका शरीर अधिक लचीला भी बनता हैं।

- योग से बच्चों का इम्‍यून सिस्टम मजबूत होता है और इससे वे बीमारियों से लड़ पाते हैं।

- बच्चों के रोजाना योग करने से उनका काम के प्रति ध्यान केंद्रित होता है और बच्चों के मस्तिष्क का विकास भी सही रूप में होता है।

- बच्चों को एक्टिव बनाने और आत्मविश्वास बढ़ाने में योगा बहुत ही उपयोगी हैं।

- बच्चों को फिट रखने और मौसमी बीमारियों से बचाने के लिए योगा काफी मददगार है।

- सूर्य नमस्कार, मेडीटेशन और योगासन से चंचल बच्चों का मन शांत होता है।

- योगासन से बच्चे तनावमुक्त होते हैं और डिप्रेशन जैसी समस्याओं से बचते हैं।

- योग के जरिए जिद्दी बच्चों को ठीक किया जा सकता है और जिन बच्चों को बहुत गुस्सा आता हैं उनके गुस्से को नियंत्रि‍त करने में योग बहुत फायदेमंद है।

- सकारात्मक सोच और बच्चों के संपूर्ण विकास के लिए बच्चों को योग करवाना अतिआवश्यक हैं।

योग के दौरान सावधानियां :

- बच्चों को योगासन कराने से पहले ध्यान रखें कि बच्चा खाली होना चाहिए।

- बच्चों को योग उसी स्थिति में करवाना चाहिए जब आप बच्चे को सप्ताह में कम से कम पांच दिन योग करवा सकें यानी नियमित रूप से योगा करवाना जरूरी हैं।

- योग के दौरान बच्चे को शुरूआत में ही सब कुछ एकसाथ ना करवाएं। बल्कि धीरे-धीरे अभ्यास करवाएं। जैसे शुरू के सप्ताह में 15 मिनट, दूसरे सप्ताह में 30 मिनट।

- बच्चों को योग के दौरान बीच-बीच में रिलैक्स करवाने के लिए श्वासन जरूर करवाएं जिससे बच्चे थके नहीं।

- योग के दौरान बच्चों को बोर ना हो इसके लिए आपको कोई लाइट म्यूजिक थीम चलाना चाहिए, इससे बच्चों का मन लगा रहे।

- हो सके तो आप भी बच्चों के साथ योगासन करें।

Wednesday, 17 February 2016

आपके बच्चों के विकास के लिए क्या है संतुलित आहार....जानिए

healthpatrika.com     19:40:00    
आजकल के छोटे-छोटे बच्चों में कई ऐसी बीमारियां देखने को मिल रही हैं, जो अधिक उम्र में हुआ करती थी जैसे डायबिटीज। ऐसा सिर्फ इसीलिए होता है क्योंकि बच्चों की खानपान और जीवन शैली बेहद बदल गई है। आजकल के बच्चे पौष्टिक खाना खाने के बजाय जंकफूड अधिक शौक से खाते हैं।

suitable balanced diet for kids


जिससे कई नई बीमारियां होने की संभावना बढ़ जाती है। क्या आपको मालूम है बच्चों के लिए संतुलित आहार बहुत जरूरी होता है। इतना ही नहीं बच्चों का विकास संतुलित आहार पर ही निर्भर करता है। जानिए बच्चों के संतुलित आहार के बारे में कुछ और मत्वपूर्ण बातें।

बच्चों की सही परवरिश में उनके खाने-पीने का सही खयाल रखना बेहद जरूरी अंग है। बच्‍चे अकसर आनाकानी करते हैं और आपकी बात नहीं सुनते हैं। ऐसे में जरूरी है कि खाने में उनकी पसंद और पौष्टिकता का सही तालमेल बैठाया जाए।

बच्चे के लिए जरूरी पौष्टिक तत्व :-

कैलोरी- पांच साल से ऊपर के बच्चे को पूर्ण कैलोरी मिलनी चाहिए। जिससे बच्चा अधिक से अधिक सक्रिय रह सकें। हाई कैलोरी देने का मतलब यह नहीं कि आप बच्चे को तला हुआ खाना खिलाएंगे बल्कि आपको बच्चे को दूध देना चाहिए और साथ ही अनाजयुक्त खाद्य पदार्थ भी देने चाहिए।

प्रोटीन- बढ़ते बच्चों के लिए प्रोटीन बहुत जरूरी तत्व होता है।  बच्चो की मांसपेशियों के सही से विकास के लिए और हड्डियों में मजबूती लाने के लिए प्रोटीन बहुत आवश्यक होता है। इसके लिए बच्चो को पनीरयुक्त  खाद्य पदार्थ और दूध, अंडे इत्यादि देने चाहिए।

मिनरल्स एंड विटामिंस- बच्चों के संपूर्ण विकास के लिए जरूरी है उन्हें विटामिन और मिनरल आहार अधिक मात्रा में दिया जाएं। बच्चों को ऐसे पौष्टिक पदार्थ देने चाहिए जिनमें कैल्शियम भरपूर मात्रा में हो (जैसे- दूध)। विटामिन और आयरन के लिए बच्चों को अधिक से अधिक हरी पत्तेदार सब्जियां देनी चाहिए।

फल- फलों में विटामिन, आयरन और अन्य पौष्टिक तत्व पर्याप्त मात्रा पाए जाते हैं। बच्चों को अधिक से अधिक फलों का जूस और मौसमी फलों का सेवन करवाना चाहिए। बच्चों को अंगुर, सेब, संतरा इत्‍यादि फलों की सलाद या जूस पिलाया जा सकता है।

पानी और फाइबर- बच्‍चों के स्‍वास्‍थ्‍य के लिए पानी का महत्‍व बहुत अधिक है, ऐसे में बच्‍चों को अधिक से अधिक पानी पिलाना चाहिए और सूप जैसे तरल पदार्थ भी पिलाना चाहिए। इसके साथ ही बच्‍चों को फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ देने चाहिए जिससे बच्‍चों में पानी की कमी ना हो सकें।

कैसे दें बच्‍चों को संतुलित आहार :-

- बच्‍चों को संतुलित आहार की आदत डालने के लिए जरूरी है कि आप प्रतिदिन अपने बच्चें को 5 अलग-अलग उसकी पसंद के पौष्टिक खाद्य पदार्थ दें।

- बच्‍चों को खिलाने-पीलाने के लिए जिद ना करें बल्कि बच्चे को प्यार से समझाएं।

- बच्‍चों के खाने को कलरफुल बनाने के लिए बच्‍चों के लिए सलाद, कच्चे फल और सब्जियां काट कर दें जिससे बच्चें शौक-शौक में उसे खाएं।

- बच्‍चों को बाहर खेलने की इजाजद दें जिससे बच्‍चों को अधिक भूख लगेगी तो वह अधिक खाना खाएगा।

- बच्‍चों को पौष्टिक खाना खाने की आदत डालें और जंकफूड से तो बच्‍चों को दूर ही रखें।


अपरोक्त नियमो का पालन व्यवहारिक जीवन में नियम के साथ कराने से आप अपने बच्‍चों के बेहतर स्वास्थ्य व भविष्य को सुनिश्चित कर सकतें हैं।

Saturday, 13 February 2016

पैरासीटामॉल दवा लेने वाले बच्चों में बढ़ जाता है दमा का खतरा....जाने क्यों?

healthpatrika.com     13:35:00    
दर्द और बुखार से पीडि़त बच्चों को डॉक्टर आमतौर पर पैरासीटामॉल देते हैं। परन्तु एक नए शोध में सामने आया है कि पैरासिटेमॉल से मिलने वाले तुरंत आराम से खिलते बच्चों का चेहरा आगे जाकर दमा की गिरफ्त में आने से कुम्हला सकता है।

paracetamol may be dangerous to the health


ब्रिस्टोल विश्वविद्यालय के डॉ. मारिया मागुंस की टीम ने नये शोध में यह खुलासा किया है कि बच्चो को बुखार में दी जाने वाली सर्वाधिक प्रचलित दवा कैलपॉल और डिस्प्रॉल में पैरासीटामॉल होता है और ये दवाएं लेने वाले बच्चों में तीन साल की उम्र में पहुंचते-पहुंचते दमा की चपेट में आने की आशंका 29 प्रतिशत तक बढ़ जाती है। इसके अलावा शोध में यह भी बात सामने आई है कि यदि गर्भवती महिलाएं इन दवाओं का इस्तेमाल करती हैं तो उनके बच्चों में तीन साल की अवस्था में पहुचते-पहुचते दमा की शिकायत होने की आशंका 13 प्रतिशत तक बढ़ जाती है और सात की उम्र तक यह आशंका 27 प्रतिशत तक पहुंच जाती है।


ब्रिस्टोल विश्वविद्यालय और ओस्लो विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने 1,14,500 गर्भवती महिलाओं के डाटा का अध्ययन और उनके सात साल तक की उम्र के बच्चों के स्वास्थ्य की जांच की। इस अध्ययन के बाद डाक्टर इस नतीजे पर पहुंचे कि पैरासीटामॉल की वजह से शरीर में फ्री रैडिकल्स बढ़ जाते हैं और इससे बच्चों को एक तरह की एलर्जी होती है जो आगे जाकर दमा का रूप लेती है।

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