हिन्दू
धर्म में भोजन को केवल खाद्य पदार्थ ना मानकर पूजनीय भी माना गया है। अन्न अर्थात
अनाज को देवता का दर्जा दिया जाता है, सस्त्रो
के अनुसार किसी का झूठा भोजन कर आप किसी का दुर्भाग्य अपने नाम कर लेते हैं। तो
आइये जानते है क्यों नही खाना चाहिए किसी का झूठा भोजन..
1.क्यों
नहीं खाना चाहिये किसी का झूठा :-
लोगों के
बीच ऐसी मान्यता है कि किसी का जूठा खाने से प्यार बढ़ता है,
लेकिन शाष्त्रों के अनुसार किसी का झूठा भोजन कर आप किसी का
दुर्भाग्य अपने नाम कर लेते हैं। दरअसल हिन्दू धर्म में भोजन को केवल खाद्य पदार्थ
ना मानकर पूजनीय भी माना गया है। अनाज को देवता का दर्जा दिया जाता है, ऐसी मान्यता है कि अन्न को ग्रहण करने से ही हमें जीवन दान मिलता है इसलिए
अन्न से ऊपर कुछ नहीं होता है। तो आइये विस्तार से जानें कि किसी का झूठा खाने के
पीछे हिन्दू धर्म और शाष्त्रों में क्या मान्यताएं हैं।
2.भोजन
और भजन को रखा जाता है गुप्त :-
शास्त्रों
में भोजन और भजन दोनों को गुप्त रखकर करना को बताया गया है। दरअसल भोजन हमारे शरीर
को ऊर्जा प्रदान कर हमारे प्राणों का संचार करता है। भोजन से ही वात,
पित्त और रक्त आदि में ऊर्जा का संचार होता है। वहीं पंच कर्म
पद्धति में जीवन शैली को निर्वाह करने के कुछ नियम बताएं गए हैं, जिनमें से भोजन करना सबसे ऊपर नियम है। शास्त्रों के अनुसार भोजन हमेशा
शांत रहते हुए, सुखासन में बैठकर और सात्विक सुविचारों के
साथ ही करना चाहिए। साथ ही शास्त्रों में
किसी का जूठा खाने पर भी बड़ा प्रतिबंध है। शाष्त्रों के अनुसार झूठा खाने से तन
और मन पर बहुत सारे दुष्प्रभाव पड़ते हैं।
3.ज्योतिषशास्त्र
के अनुसार :-
ज्योतिषशास्त्र
के अनुसार किसी भी व्यक्ति की कुण्डली का दूसरा भाव जुबान,
वाणी सुख, कलत्र, धन की
बचत और जीवन में मिलने वाले सुखों को संबोधिक करता है। तो यदि दूसरे भाव में
व्यक्ति की वाणी और भाषा पर नकारात्मक असर पड़ता है तो भाषा में कर्कशता का भाव
आता है और कई दुष्प्रभाव पड़ते हैं।
4.सुख
हो जाते हैं कम :-
ऐसी
मान्यता है कि किसी का झूठा खाने से घर-परिवार में कलह बढ़ती है। साथ ही ऐसा भी
माना जाता है कि झूठा खाने से भोग-विलासिता में भी कमी आती है।
5.अशुद्ध
विचार और निर्धनता आती है :- ऐसा माना जाता है
कि जिसका जूठा खाते हैं, उसके अशुद्ध विचार
आपके मन में भी घर कर जाते हैं। इसके अलावा यह भी माना जाता है कि झूठा खाने से धन
संचय नहीं हो पाता है और निर्धनता आती है।

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